“स्काउट होना गर्व की बात है, और स्काउट बने रहना जिम्मेदारी की बात।”

 









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“स्काउट होना गर्व की बात है,

और स्काउट बने रहना जिम्मेदारी की बात।”

विजयंत स्काउट ग्रुप पर आज सुबह से चहल पहल थी।बच्चे तय समय से आधा घंटा पहले ही आकर ग्रुप गतिविधि केंद्र परसरामपुरिया एकेडमी पर बड़े ही उत्साह के साथ दीक्षा संस्कार समारोह की तैयारियों को मूर्त रूप देने में ले हुए थे।कार्पेट बिछाना, बेंच लगाना, गुरुजनों की तस्वीरों को सजाना, स्टेज पर कुर्सी,टेबल, पोडियम लगाना, बैनर टांगना, स्कार्फ घड़ी करना, बेज ट्रे में रखना, ध्वज फहराने की तैयारी करना, बुलबुल ट्री सजाना और इन सबको करके कार्यक्रम की रिहर्सल करना, यकीन मानिए 1 घंटे में बच्चे ये सभी कार्य कुशलता के साथ संपन्न कर ठीक 10 बजे अतिथि महोदय और अभिभावकों के स्वागत के लिए तत्पर तैयार खड़े थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दैनिक नईदुनिया के वरिष्ठ संपादक श्री ईश्वर शर्मा जी ठीक 10 बजे परसरामपुरिया एकेडमी पर पधार चुके थे।कमी थी तो बच्चों के अभिभावकों की।10 मिनट में वे भी आ गए और दीक्षा संस्कार का गरिमामय समारोह शुरू हो गया।

अतिथियों का स्वागत सेल्यूट के साथ हुआ और फिर उनके मंचासीन होने पर प्रार्थना एवं ध्वज शिष्टाचार संपन्न हुआ।

स्काउटिंग के संस्थापक सर लार्ड एवं लेडी बेड़ेन पावेल, विजयंत स्काउट ग्रुप के संस्थापक गुरुवर श्री प्रकाश जी दिसोरिया, ग्रुप के संरक्षक श्री श्यामदास जी अग्रवाल एवं इंदौर स्काउटिंग के आधार स्तंभ श्री रामचंद्र जी राहगीर व श्री उदयभानु जी अमेरिया की तस्वीरों पर माल्यार्पण के साथ उनकी तस्वीरों के समक्ष दीप प्रज्वलन कर उनकी स्मृतियों को प्रणाम किया गया।

ग्रुप की गाइडर श्रीमती अमिता जैन, श्रीमती पूजा जैन, श्रीमती आर्शी आमिर एवं सुश्री चेतना यादव द्वारा अतिथियों को स्कार्फ पहनाकर स्वागत किया गया।

दीक्षा संस्कार के महत्व पर ग्रुप स्काउटर श्री कुणाल मिश्र द्वारा प्रकाश डाला गया।उन्होंने बताया कि एक ब्राह्मण के जीवन में जो महत्व यज्ञोपवीत संस्कार का है वहीं महत्व स्काउटिंग में दीक्षा संस्कार का है।अभिभावकों को संबोधित करते हुए श्री मिश्र ने बताया कि जब आपका बच्चा स्काउट बनने के लिए दीक्षा लेता है, तो वह केवल एक यूनिफॉर्म नहीं पहनता, बल्कि वह अनुशासन, सेवा, सत्य और साहस को अपने जीवन का अंग बनाने का संकल्प लेता है।दीक्षा संस्कार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में एक नए चरित्र, नई जिम्मेदारी और नई सोच की शुरुआत है।आज जो बच्चे दीक्षा ले रहे हैं, कल वही बच्चे—अच्छे विद्यार्थी,संवेदनशील इंसान,जिम्मेदार नागरिक और संभव है कि देश के श्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता बनेंगे।

श्रीमती पूजा जैन ने विजयंत स्काउट ग्रुप की स्थापना एवं गतिविधियों के बारे में बताया कि 1976 में गुरुवर स्वर्गीय श्री प्रकाश दिसोरिया सर द्वारा विजयंत स्काउट ग्रुप की स्थापना की गई, तब से लेकर आज तक विजयंत ग्रुप युवाओं के चरित्र को गढ़ने एवं उन्हें संस्कारशील तथा सेवाभावी बनाने की दिशा में प्रयत्नशील है।ग्रुप के तमाम स्काउट गाइड रोवर रेंजर स्काउटिंग का सर्वोच्च पुरस्कार "राष्ट्रपति पुरस्कार" प्राप्त कर चुके हैं।ग्रुप के स्काउट गाइड जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक स्काउट गतिविधियों में अपनी प्रतिभागिता से विजयंत ग्रुप का नाम रोशन किए हैं।हर रविवार ग्रुप की गतिविधियां सुबह 9 से 12 बजे तक परसरामपुरिया एकेडमी पर आयोजित होती है।

इसके पश्चात दीक्षा संस्कार का मुख्य कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।स्काउट प्रतिज्ञा को दोहराते हुए स्काउट गाइड ने ईश्वर और देश के प्रति अपने कर्तव्य निभाने की, स्काउट नियम का पालन करने की एवं प्रतिदिन एक भलाई का कार्य करने की शपथ लेते हुए भारत स्काउट गाइड बेज, वर्ल्ड स्काउट बेज एवं ग्रुप का स्कार्फ प्राप्त किया।प्रथम एवं द्वितीय सोपान उत्तीर्ण करने वाले स्काउट गाइड को भी बेज प्रदान किए गए।

कब बुलबुल का दीक्षा संस्कार एवं बेज वितरण भी संपन्न हुआ।

स्काउट गाइड ने इस अवसर पर गीत प्रस्तुत किए तथा फर्स्ट एड के अपने ज्ञान को प्रदर्शित किया।उन्होंने विभिन्न तरह की पट्टियां, स्ट्रेचर एवं वन मेन लिफ्ट इत्यादि कलाओं का प्रदर्शन किया।

स्काउट गाइड बच्चों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए मुख्य अतिथि श्री ईश्वर शर्मा ने दीक्षित स्काउट गाइड को बधाइयां देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।उन्होंने अभिभावकों को भी बधाई देते हुए कहा कि आपके सहयोग के बिना स्काउटिंग अधूरी है।जब आप बच्चों को समय पर अभ्यास के लिए भेजते हैं,जब आप उनके कैंप, रैली और सेवा कार्यों में उन्हें प्रोत्साहित करते हैं—तब आप अनजाने में एक अच्छे नागरिक के निर्माण में भागीदार बनते हैं।बच्चों को छोटी छोटी कहानियां सुनाते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में ली गई ट्रेनिंग जीवन भर हमारे साथ रहती है और हमारा मार्गदर्शन करती है।उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि आप ईमानदार बनेंगे, जिम्मेदार बनेंगे और हर परिस्थिति में सही का साथ देंगे।उन्होंने कहा कि स्काउट की पहचान यह नहीं कि वह सबसे आगे चलता है,

बल्कि यह है कि वह मुसीबत में सबसे पहले खड़ा होता है।एक सामान्य बच्चे की तुलना में एक प्रशिक्षित स्काउट जीवन जीने की कला में अधिक निपुण बन जाता है।

समारोह में हर रविवार स्काउट गाइड बच्चों का ध्यान रखने वाले और उन्हें नाश्ता बनाकर देने वाले परसरामपुरिया एकेडमी की कमला दीदी और बाबू भैया का सम्मान भी किया गया।

राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

कार्यक्रम का संचालन श्री कुणाल मिश्र द्वारा एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती आर्शी आमिर द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में रोवर रेंजर अनिरुद्ध मुजावदिया, दिव्या गरडे, समर्थ अग्रवाल, अक्षय काबरा, अतिवीर प्रजापत एवं आराध्य बोड़खा का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम समाप्ति के बाद मैं  तो अभिभावकों के साथ बात कर रहा था उस दौरान आधे घंटे में बच्चों ने बगैर कुछ बोले सारा सामान सहेज कर वापस स्कूल के हाल को उसका मूल स्वरूप प्रदान कर दिया।अब हाल में कुछ रह गया था तो वह था केवल धन्यवाद....

शाबाश मेरे प्यारे बच्चों....बधाइयां और खूब खूब प्यार♥️🌹♥️

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