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बगैर पानी पिए पहाड़ चढ़ने का चैलेंज....
इस बार हम थे 101....94 नन्हें मुन्ने छठी क्लास के बच्चे और 7 शिक्षक। ताजुब्ब और विचारणीय बात यह थी कि 94 बच्चों में से केवल 4 बच्चे इन्दौर के बायपास पर स्थित इस रालामंडल पहाड़ी पर पहले आए हुए थे, याने इतने पास रहते हुए भी 90 बच्चों के लिए रालामंडल पहाड़ी का भ्रमण पहली बार था, खैर....
उत्साह बच्चों का पूरे वातावरण में व्याप्त था....अच्छा तो उस पहाड़ी पर चढ़ना है, चढ़ जायेंगे सर....
थकोगे तो नहीं, नहीं सर चढ़ जायेंगे....
और बच्चों के हर उत्साही समूह की तरह इन स्काउट गाइड ने भी चुना सीधी खड़ी पहाड़ी पर चढ़ने का बेतरतीब रास्ता....खुशी हुई मुझे....
चलो अब एक चैलेंज की और बात करे क्या??
बच्चों का उत्साह देख मैने प्रश्न उछाला, बताइए सर....
थोड़ा कठिन चैलेंज है, बताइए तो सही सर....
देखो करीब एक सवा घंटा लगेगा ऊपर सीधी पहाड़ी चढ़ने के लिए, क्या रास्ते में बगैर पानी पिए चढ़ सकते हैं पहाड़ी के शिखर तक..... चढ़ सकते हैं सर, चैलेंज स्वीकार है....
देखो जरूरी नहीं है कि चैलेंज स्वीकार ही करो, अगर लगे कि कष्ट हो रहा है, तकलीफ हो रही है तो पी लेना पानी, मैने कहा...
अच्छा एक बात और याद आई है मेरे सर कहा करते थे कि अगर बहुत प्यास लगे और पानी नहीं हो तो क्या करोगे, क्या करेंगे सर???
सर ने बताया था रास्ते में पड़े एक छोटे से कंकर को मुंह में रख लेना, निगलना मत, दो मिनिट में वो कंकर तुम्हारे मुंह में लार बनाने लग जाएगा और तुम्हारी प्यास की तलब को शांत कर देगा।
तो अगर आज बहुत प्यास लगने लगे तो पानी पीने के पहले इस जुगाड़ को आजमा लेना, ठीक है सर और चल पड़े ये नन्हें कदम शिखर की बुलंदी को नापने के लिए।
सुखद आश्चर्य था कि 94 स्काउट गाइड में से लगभग 80 बच्चों ने इस चैलेंज को पूरा कर हर्षनाद पाई।बहुत खुश थे बच्चे और बच्चों के साथ मैं कि अधिकांश बच्चे पहली बार ऐसी खड़ी चढ़ाई वाले फिसलन भरे रास्ते का सामना करते सफलतापूर्वक शिखर तक पूरे उत्साह के साथ पहुंचे।शाबाश मेरे प्यारे बच्चों♥️👍♥️





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