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बाहुबली हिल्स, उबेश्वर महादेव और रायता हिल्स के शानदार नजारें....
उदयपुर बाइक एक्सपीडिशन(भाग 4)
हमारी यात्रा का चौथा दिन याने अंतिम दिन। सुबह 9 बजे नाश्ता कर होटल चेक आउट कर हम सभी सबसे पहले पहुंचे बाहुबली हिल्स। 750 मीटर की चढ़ाई, पर ऊपर पहुंचकर स्वर्गीय दृश्यावली। चारों ओर बड़ी लेक का अथाह पानी और बीच बीच में बने टापू।आनंद आ गया।
जो लोग ऊपर नहीं चढ़े वे लेक में पास के ही छोटे से टापू पर मस्ती करते रहे।गर्मी और उमस में यहां गन्ने का रस संजीवनी बूटी सा प्रतीत हुआ।
यहां से खूब ऊंचाई पर 12 किलोमीटर के बाद पहुंचे उबेश्वर महादेव। हरी भरी पहाड़ियों के बीच बहुत ही सुंदर शिव मंदिर है यह।दर्शन के पश्चात यहां बैठने की अच्छी व्यवस्था देख हम भेल खाने के लिए यहां रुक गए।जब ककड़ी टमाटर काट रहे थे तो दो ग्रामीण आ गए और बोले आप यह सब छोड़िए यहीं दाल बाफला का प्रसाद ग्रहण कीजिए।हम लोगों ने नम्रता से कई बार मना किया पर उनका आग्रह बहुत प्रबल था, एक दादा की आंखों में तो आंसू आ गए और वे हाथ जोड़कर खड़े हो गए।अब हम भी द्रवित हो उठे और परिणामस्वरूप करीब 15-20 साथी दाल बाफले का प्रसाद लेने चले गए। हम भेल बनाकर खाने लगे तो वे दादा लड्डू प्रसाद का भगोना और छाछ की बाल्टी लेकर आ गए और हमें खिलाकर ही गए।अभिभूत थे हम सभी उनके इस आतिथ्य सत्कार पर।सभी उनको प्रणाम कर धन्यवाद देते हुए वहां से विदा हुए।दाल बाफले अपने बस के तो थे नहीं, बेहतरीन ककड़ी, टमाटर, प्याज, नींबू, कोथमीर डाल कर अपनी इंदौर की सेव परमल नुक्ति मिक्सचर नमकीन परमल की जो भेल यहां खाई ना उसका स्वाद अभी भी जबान पर है, सच विटामिन सेव की जो कमी हो गई थी चार दिनों में शरीर में वो आज पूरी हो गई।आत्मा तृप्त हो गई।
15 किलोमीटर का रायता हिल्स का रास्ता तो बहुत ही मनमोहक था।राजेश भाई पूछ रहे थे यार तुमको कौन बता देता है ये सब जगहें और मेरे मन में विजय मामा घूम रहे थे जिन्होंने यह रूट प्लान करके मुझे दिया था। बस ड्राइवर बहुत घबरा रहा था क्योंकि वह पहली बार इस रास्ते पर आया था।पर हमारे जोश दिलाने पर वह रायता ले ही आया।रायता भी बहुत प्यारी जगह है। टॉप पर पहुंचे तो चारो ओर बहुत ही सुंदर नजारें।उदयपुर के कई जोड़े यहां प्री वेडिंग शूट करा रहे थे।हर पहाड़ी पर कारें और टूरिस्ट मौजूद थे।चाय पिलाने वाले दुकानदार बोल रहे थे इस बार पानी कम गिरा हैं नहीं तो आपको और आनंद आता यहां जगह जगह छोटे छोटे झरनों में नहाकर।
रायता हिल्स से अलसीगढ़ की खूबसूरती को निहारते, जगह जगह बने वाटर डेम, छोटे झरने निहारते हम उदयपुर पहुंचने वाले थे तो खयाल आया कि जहां से बस पकड़नी है वह जगह राखी के घर फूड हाउस के पास है तो क्यों ना आधा घंटा जो बचा है सड़क पर खड़े रहकर गुजारने के बजाए वहीं चला जाए।राखी को फोन किया तो बोली आ जाओ चाय बनाकर रखती हूं।वहां पहुंचे तो चाय के साथ गरमा गरम कचोरी भी हाजिर थी।सभी ने मुंह हाथ धोते हुए दिनभर की थकान मिटाई और कपड़े वगैरह चेंज कर लिए।सभी अभिभूत थे राखी बबली और परिवारजनों की मिलनसारिता और सहज सरल व्यवहार से।रात को बस में करने के लिए भोजन के पैकेट भी यही से बनवा लिए थे जो बहुत ही स्वादिष्ट थे।साधुवाद, दिल से आभार राखी दिल से हम सभी के लिए इतना कुछ करने के लिए🙏
रात में बस में इंदौर के लिए बैठा तो मन ही मन परमपिता परमेश्वर को धन्यवाद दे रहा था सकुशल एक्सपीडिशन संपन्न कराने के लिए और दिल से साधुवाद दे रहा था सभी साथियों को कि कितना उत्साह, ऊर्जा थी सभी के पास और क्या ही गजब की सक्रिय अनुशासित सहभागिता थी सभी की जिसके कारण विजयंत ग्रुप की एक ओर यादगार एक्सपीडिशन इतने आनंदमय वातावरण में सम्पन्न हुई।
एक्सपीडिशन के स्नेहिल साथीगण:-
श्रीमती जया श्री राजीव जी अग्रवाल
श्रीमती सविता श्री रवि जी गुप्ता
श्रीमती ऋतु श्री राजेश जी अग्रवाल
श्रीमती शिखा श्री विजय जी बियाणी
श्रीमती जास्मिन श्री संजय जी कोठारी
श्रीमती मनीषा श्री प्रताप जी दुबे
श्रीमती ज्योति श्री दीपक जी कोठारी
श्रीमती शीतल श्री पारस जी जैन
श्रीमती मंजू श्री महेश जी पोरवाल
श्रीमती अंजना श्री प्रमोद जी फरक्या
श्रीमती सविता श्री कृष्णकांत जी मुजावदिया
श्रीमती नेहा श्री भारत जी शर्मा
श्रीमती सोनल श्री सुनील जी चौहान
श्री बालेश जी चौरसिया
श्री किशन जी थावरानी
श्री अक्षय जी होल्कर
श्री संजय जी गोयल
श्री अंकुर जी साहू
श्री निकुंज जी गोयल
श्रीमती स्मिता श्री कुणाल जी मिश्र






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