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कर्तव्य, सेवा और अनुशासन का भावनात्मक उत्सव – 22 फरवरी
22 फरवरी…
एक ऐसी तिथि, जो केवल कैलेंडर का दिन नहीं, बल्कि सेवा और संस्कार का उत्सव है।
आज के पावन दिवस पर अवसर था 1963 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त स्काउट श्री रामदास जी अग्रवाल द्वारा स्थापित "स्काउट रामदास केदारमलजी सुकृत न्यास" की घोषणा एवं प्रथम कार्यक्रम का।
ट्रस्ट का उद्देश्य रखा गया स्काउट आंदोलन की सेवा, स्काउट गाइड बच्चों को ट्रेनिंग मटेरियल, यूनिफार्म इत्यादि प्रदान करना और स्काउटिंग आंदोलन में जी जान लगा देने वाले स्काउटर गाइडर का सम्मान करना।
सर्वप्रथम मेरे नन्हें मुन्ने स्काउट गाइड बच्चों ने "अच्छे बच्चे बनना हमको अच्छा लगता है - दीन दुखी की सेवा करना अच्छा लगता है" गीत गाकर वातावरण में जो ऊर्जा प्रदान की वह अंत तक बनी रही।
स्काउट प्रार्थना के पश्चात स्काउट आंदोलन के संस्थापक लार्ड बेड़ेन पॉवेल एवं लेडी ओलेव बेडेन पावेल के जन्मदिवस पर जब उनके चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित हुआ, तो केवल एक दीपक नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प प्रज्ज्वलित हुआ। वातावरण में श्रद्धा थी, अनुशासन था और भीतर से उठती एक मौन प्रतिज्ञा थी — “हम तैयार हैं।”
इंदौर में स्काउटिंग को जन-जन तक पहुँचाने वाले हमारे पूज्य गुरुजनों —
स्वर्गीय श्री रामचंद्र जी राहगीर,
स्वर्गीय उदयभानु जी अमेरिया,
स्वर्गीय प्रकाश जी दिसोरिया एवं
स्वर्गीय सेठ श्री श्यामदास जी अग्रवाल —
की तस्वीरों पर जब पुष्प अर्पित हुए, तो लगा मानो उनकी तपस्या आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
ट्रस्ट अध्यक्ष श्री रामदास जी, कोषाध्यक्ष श्री भगवान अग्रवाल जी एवं श्री मोहनलाल जी गोयल द्वारा अतिथियों का स्वागत केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मीय था। बड़ी संख्या में उपस्थित पूर्व राष्ट्रपति स्काउट, स्काउटर-गाइडर, स्काउट-गाइड एवं स्नेहीजन इस आयोजन को एक परिवार का मिलन बना रहे थे।
वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन ऑफ स्काउट मूवमेंट एशिया पैसिफिक सपोर्ट सेंटर के डायरेक्टर समारोह के मुख्य अतिथि श्री एस.प्रसन्ना श्रीवास्तव जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में समाज को स्काउटिंग की पहले से अधिक आवश्यकता है। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा प्रारंभ किए गए सेवा-संकल्पों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्काउटिंग के प्रचार प्रसार एवं युवाओं की मदद के लिए स्थापित यह ट्रस्ट देश में एक पहल कायम कर और भी लोगों को प्रेरित करेगा। उनके शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि दिशा देने वाले विचार थे।
जब भोपाल के सेंट मोंटफोर्ट विद्यालय में सेवाएं दे रहीं लीडर ट्रेनर गाइड श्रीमती आशा सिंह बुंदेला और बैतूल के वरिष्ठ स्काउटर श्री श्रवण कुमार दवंडे का सम्मान किया गया, तो वह क्षण विशेष रूप से भावुक था। 73 और 82 वर्ष की आयु में भी गत 50 वर्षों से लगातार सक्रिय सेवा… यह केवल उपलब्धि नहीं, यह जीवन का आदर्श है।
शाल, श्रीफल, सम्मान पत्र और ₹21,000 की श्रद्धा निधि के साथ दिया गया सम्मान उनके समर्पण को प्रणाम था।ट्रस्ट उन्हें सम्मानित कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।
इस अवसर पर स्काउट दलों के लिए तैयार प्रशिक्षण सामग्री का अनावरण भविष्य की पीढ़ियों के लिए आशा का संदेश लेकर आया।
सम्मान पत्र का वाचन डॉ लोकेश जी जोशी द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट मंत्री
असिस्टेंट लीडर ट्रेनर श्री कुणाल मिश्र ने किया।
कार्यक्रम के अंत में जब श्री रामदास जी का जन्मदिन मनाया गया, तो वह क्षण अत्यंत आत्मीय था। अपने धन्यवाद वक्तव्य में उन्होंने भावुकता से कहा कि यदि हम प्रतिदिन एक छोटा सा सेवा कार्य भी कर सकें, तो वही जीवन का सच्चा उत्सव होगा। उनके शब्दों में विनम्रता थी, कृतज्ञता थी और सेवा के प्रति अटूट विश्वास था।
पूरा आयोजन मानो एक संदेश बन गया —
"सेवा केवल शब्द नहीं, जीवन शैली है।
अनुशासन केवल नियम नहीं, संस्कार है।
और कर्तव्य केवल जिम्मेदारी नहीं, हमारा धर्म है।"
अंत में वंदे मातरम् के साथ जब कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, तो हर हृदय में एक ही भावना थी —
"हम समाज को थोड़ा बेहतर बनाने का प्रयास अवश्य करेंगे।"







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