अरुणाचल बाइक एक्सपीडिशन – भाग 1 : एक नई यात्रा की शुरुआत
हर साल की तरह इस बार भी होली–रंगपंचमी के आसपास विजयंत ग्रुप की बहुप्रतीक्षित बाइक एक्सपीडिशन का समय आ गया था।
हमारी ये यात्राएँ सिर्फ जगहें देखने के लिए नहीं होतीं, वे मन में छुपे रोमांच को जगाने और दोस्तियों को और गहरा करने का अवसर भी होती हैं।
4 मार्च की सुबह, इंदौर एयरपोर्ट पर हम सब उसी उत्साह के साथ इकट्ठा हुए थे। सुबह-सुबह गरमागरम पोहे की खुशबू, खमण और कचौरी समोसे का स्वादिष्ट नाश्ता और दोस्तों की ना थमने वाली बातें और निश्चल हँसी — यात्रा की इस शुरुआत ने ही बता दिया था कि आने वाले दिन यादगार होने वाले हैं।
इंदौर से दिल्ली और फिर दिल्ली से डिब्रूगढ़ की उड़ान थी। घर से लाया गया एक समय का पका हुआ भोजन हमारे साथ था, इसलिए दिल्ली पहुँचते ही विमानतल में जैसे छोटा-सा भंडारा ही शुरू हो गया। कोई कह रहा था —
“भैया यह सब्ज़ी चखो…”
“यह पापड़ चूरी भी लो…”
"मेरे परांठे भी तो खत्म करो"
“अरे यह शाही करेला तो आपने लिया ही नहीं…” और
"यह लो साथ में घर का बना अचार।"
सच कहें तो वह सिर्फ भोजन नहीं था, वह खालिस मातृशक्तियों के अपनेपन और प्रेम का स्वाद था।
सुबह 7:30 बजे निकले थे और देखते ही देखते दोपहर 1:45 पर हम डिब्रूगढ़ पहुँच चुके थे। चाय के बागानों से घिरा यह छोटा-सा सुंदर एयरपोर्ट — मोहनबारी एयरपोर्ट, जिसे डॉ. भूपेन हजारिका एयरपोर्ट भी कहा जाता है — पूर्वोत्तर भारत की शांत और हरी दुनिया का पहला स्वागत द्वार लगा। एयरपोर्ट से एक बस और एक टेम्पो ट्रैवलर हमारा इंतज़ार कर रहे थे। अगले नौ दिनों तक यही हमारे साथी रहने वाले थे।
हम तिनसुकिया के लिए निकल पड़े। होटल में चेक-इन करने के बाद सीधे पहुँचे ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे गुईजन घाट। वहाँ हमारे ग्रुप के लिए एक बड़ी हाउस बोट तैयार खड़ी थी। विशाल ब्रह्मपुत्र की धारा के बीच उस बोट पर बिताए पाँच-छह घंटे मानो समय से चुरा लिए गए पल थे। नदी की गहराई को निहारते हुए गाने गाना, अंताक्षरी खेलना, फोटो खींचना, नाचना और बस खुलकर हँसना — यही तो यात्राओं की असली पूँजी होती है।
बोट पर ही चाय और स्नैक्स का इंतज़ाम था। बीच में एक छोटे से आइलैंड पर रुककर कैंप फायर किया गया। लहरों की धीमी आवाज़ और आग की रोशनी के बीच जब सभी जोड़ों ने कपल डांस किया, तो वह दृश्य सचमुच यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। इसी बीच तिनसुकिया से बनकर हमारा शुद्ध सात्विक भोजन भी बोट पर पहुँच गया। राजीव भैया के मित्र नुवाल जी के मित्र मालपानी जी के माध्यम से पूरे नौ दिनों के लिए कैटरिंग की व्यवस्था हुई थी, और पहले ही दिन उसने दिल जीत लिया।
रात को जब हम होटल लौटे तो सुनील चौहान जी की सुव्यवस्थित व्यवस्था के अनुसार हमारी मोटरसाइकिलें भी होटल पहुँच चुकी थीं। सबने अपनी-अपनी बाइक चलाकर देखी। इंजन की आवाज़ में आने वाले रोमांच की झलक साफ सुनाई दे रही थी।
पहला दिन योजनाओं के अनुसार सफलतापूर्वक बीत गया था। मन में संतोष था, चेहरे पर मुस्कान थी और दिल में एक ही भावना —
कल से शुरू होगा असली रोमांच… अरुणाचल की पहाड़ियों की ओर।
अरुणाचल एक्सपीडिशन के स्नेहिल साथीगण:-
श्रीमती मंजू श्री अशोक जी खासगीवाल
श्रीमती किरण श्री ललित जी कोटिया
श्रीमती जया श्री राजीव जी अग्रवाल
श्रीमती सविता श्री रवि जी गुप्ता
श्रीमती संगीता श्री गोपाल जी दरियानी
श्री राजेश जी अग्रवाल
श्री विपुलकीर्ति जी शर्मा
श्री अंकुर जी साहू
श्रीमती किरण श्री दिनेश जी गोयल
श्रीमती ज्योति श्री दीपक कोठारी
श्रीमती ममता श्री अमित बंडी
श्रीमती सीमा श्री मनोज जैन मामा
श्रीमती रश्मि श्री संजय जी गोयल
श्रीमती रिया श्री मुकेश जी राजानी
श्रीमती जास्मिन श्री संजय जी कोठारी
श्रीमती शिखा श्री विजय जी बियानी
श्रीमती तरुणा श्री अक्षय जी होल्कर
श्रीमती काजल श्री गोपाल जी ज्ञानचंदानी
श्रीमती सोनल श्री सुनील जी चौहान
श्रीमती स्मिता श्री कुणाल जी मिश्र
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