जाना था जापान, पहुंच गए चीन.... उदयपुर बाइक एक्सपीडिशन(भाग 1)

 















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जाना था जापान, पहुंच गए चीन....

उदयपुर बाइक एक्सपीडिशन(भाग 1)

सोच रखा था मानसून में बाइक एक्सपीडिशन पर छत्तीसगढ़ जाना है पर नंबर लग गया उदयपुर का।

प्रेरक बने बहन पिंकी के मामेर ससुर विजय जी दशोरा और भतीजा देवांश। मामाजी उदयपुर में ही रहते हैं और बाइकिंग तथा घूमने के शौकीन हैं तो फेसबुक पर उदयपुर और आसपास के खूब शानदार फोटो डालते रहे और मुझे ललचाते रहे।वहीं भतीजा देवांश उदयपुर से 150 किलोमीटर दूर लेपर्ड सफारी के लिए महीने भर पहले जवई होकर आ गया और वहां की तारीफ करने लगा।

बस फिर क्या था 13 अगस्त की शाम 14 महिलाओं और 20 पुरुषों का हमारा विजयंत ग्रुप इंदौर रेलवे स्टेशन पर तैयार था उदयपुर जाने के लिए।हमेशा की तरह ग्रुप के वरिष्ठ प्रिय बाबूजी रामदास जी अग्रवाल हम सब को विदा देने समय निकालकर रेलवे स्टेशन पर थे।मुझे फूलमाला पहनाकर तो सभी बहुओं को 500-500 रुपए देकर यात्रा की सफलता का आशीर्वाद दिए।सच परिवार का बुजुर्ग जब आपकी इतनी परवाह करने वाला हो दिल से आपको इतना आशीर्वाद देने वाला हो तो आपके किसी भी कार्य की सफलता सुनिश्चित रहती है।हृदय की गहराइयों से आपका आभार और सादर चरण स्पर्श बाबूजी।आप शतायु हों और स्वस्थ व प्रसन्न रहते हुए हम सभी पर अपना वरदहस्त यूं ही बनाए रखें यही परमपिता परमेश्वर से मंगलकामनाएं हैं🙏

उज्जैन में हम सभी को गरमागरम चाय पिलवाकर भाई संजय कोठारी जी भी हमारे साथ हो लिए।

ट्रेन में खूब मस्ती करते और अपने साथ लाया भोजन आपस में साझा करते पूरे छप्पन भोग का आनंद हम सभी ने छक कर लिया।

सुबह 5 बजे हम सभी उदयपुर रेलवे स्टेशन पर थे। यहां एक 25 सीटर बस और 7 सीटर किया कार हमारा इंतजार कर रही थी। आठ लोग मोटरसाइकिल लेने रुक गए और बाकी बस और कार में बैठकर जैन तीर्थ राजेंद्र शांति विहार पहुंचे।दैनिक कार्यों से निवृत्त हो हमने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए।बहुत ही सुंदर मंदिर बहुत ही सुरम्य जगह पर बना हुआ था यहां।यहीं नवकारसी का भी आनंद लिया।

शुरुआत एकलिंग जी से करनी थी पर दर्शन का समय सुबह 5.30 से 8.00 और फिर 10.30 से 1.30 बजे तक का था।तो तय किया कि अब सीधे नाथद्वारा चला जाए और कोशिश की जाए कि ग्वाल दर्शन जो सुबह 9.30 से 9.45 के बीच होते हैं कर लिए जाएं। हम पहुंच भी गए 72 किलोमीटर का सफर तय करके नाथद्वारा पर संयोग से उस दिन ग्वाल दर्शन स्थगित थे।

अगले दर्शन राजभोग के 11.30 बजे होने थे तो 2 घंटे बाजार में घूमते बिताए।आजकल नाथद्वारा में 350 रुपए का सम्मुख दर्शन पास मिलता है वह ले लेना सबसे समझदारी वाला अनुभव रहा है तो वही पास 34 साथियों की पूरी टीम के लिए ले लिए।आधे घंटे में श्री जी भगवान के मन भर दर्शन कर आत्मा को तृप्त कर प्रसाद लेकर हम लोग मंदिर से प्रभु का आशीर्वाद  प्राप्त कर रवाना हुए।

हमारे साथ थी माता अन्नपूर्णाएं। कल जो घर से बनाकर लाई थी वहीं बहुत सारा भोजन बचा हुआ था, सभी ने प्रेमपूर्वक उसी का कलेवा ग्रहण किया और रवाना हुए 55 किलोमीटर दूर स्थित चारभुजा जी के लिए।

पूरे रास्ते राम देवरा तीर्थ जाने वाले श्रद्धालुओं का कारवां देखने लायक था।कोई पैदल, कोई मोटरसाइकिल से तो कोई रिक्शा या आयशर से।हजारों की संख्या में ग्राम वासी जो अधिकांशतः राजस्थान और मध्यप्रदेश से थे चले जा रहे थे नीले घोड़े वाले बाबा के दर्शनों को।

चारभुजा जी पहुंचे तो वहां भी लगभग दो हजार लोग लाइन में लगे थे, हम विचार कर ही रहे थे कि क्या करें समय लगेगा यहां तो और हमे कुंभलगढ़ भी अंधेरा होने से पहले पहुंचना है तभी चमत्कार हुआ, चारभुजा जी ने हमारी दर्शनों की अभीप्सा को जान लिया और हमारे साथी उज्जैन निवासी संजय कोठारी भाई ने पुलिस वालों को अपनी दुविधा बताई तो उन्होंने हम लोगों के लिए विशेष दर्शनों की व्यवस्था बना दी और इस तरह से भगवान चारभुजा जी का आशीर्वाद हमें प्राप्त हुआ।नशा विरोधी और वृक्ष लगाने के संदेश लिखे झबले पहनने से यह विशेष कृपा कई जगह मिल जाती है।

चारभुजा जी से कुंभलगढ़ लगभग 40 किलोमीटर था।रास्ता खूबसूरत था तो बाइकिंग में मजा आ रहा था।

कुंभलगढ़ में हमारा ठिकाना था द रॉक वेली रिसोर्ट।चेक इन कर हम सभी तुरंत निकले कुंभलगढ़ किले को देखने और वहां के लाइट एंड साउंड शो का आनंद लेने।

अंधेरा होने पर शुरू हुए इस शो में कुंभलगढ़ का 2000 साल का इतिहास बताया गया।

कुंभलगढ़ किले में प्रकाश एवं ध्वनि शो की अवधि 45 मिनट की थी, इतिहास के साथ ही किले के अंदर घटी कुछ रोचक घटनाओं के बारे में भी बताया। किले को खूबसूरती से रोशन किया गया था और जैसे-जैसे ऑडियो कथाएँ चलती हैं, प्रकाश प्रभाव में बदलाव होते रहते थे। यह मनोरम शो 'ॐ' के जाप से शुरू हुआ और फिर कथाएँ जारी रही।कुल मिलाकर रोचक जानकारी कुंभलगढ़ और मेवाड़ राजवंश के राज शिरोमणि महाराजा कुम्भा के बारे में मिली।सबसे रोचक यह जानना लगा कि चीन की दीवार के बाद दुनिया में दूसरी बड़ी दीवार को हम देख रहे थे।

आज थक गए थे तो बस रिसोर्ट में पहुंचकर स्वादिष्ट भोजन किए और सो गए।

एक्सपीडिशन के स्नेहिल साथीगण:-

श्रीमती जया श्री राजीव जी अग्रवाल

श्रीमती सविता श्री रवि जी गुप्ता

श्रीमती ऋतु श्री राजेश जी अग्रवाल

श्रीमती शिखा श्री विजय जी बियाणी 

श्रीमती जास्मिन श्री संजय जी कोठारी 

श्रीमती मनीषा श्री प्रताप जी दुबे

श्रीमती ज्योति श्री दीपक जी कोठारी 

श्रीमती शीतल श्री पारस जी जैन

श्रीमती मंजू श्री महेश जी पोरवाल 

श्रीमती अंजना श्री प्रमोद जी फरक्या

श्रीमती सविता श्री कृष्णकांत जी मुजावदिया

श्रीमती नेहा श्री भारत जी शर्मा

श्रीमती सोनल श्री सुनील जी चौहान

श्री बालेश जी चौरसिया

श्री किशन जी थावरानी 

श्री अक्षय जी होल्कर 

श्री संजय जी गोयल

श्री अंकुर जी साहू

श्री निकुंज जी गोयल

श्रीमती स्मिता श्री कुणाल जी मिश्र

पिक्चर अभी बाकी है दोस्तों

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