कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता..….



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"कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...."
65 की उम्र में शासकीय नौकरी से निवृत्त होने के बाद जब अधिकांश लोग अपनी सक्रिय जिंदगी को टाटा बाय बाय कर थकाहाल जीवन व्यतीत करते हैं,उस उम्र में एक व्यक्ति एक मिशन की कल्पना करता है।लोग हतोत्साहित करते हैं,हंसी उड़ाते हैं,कार्य को असंभव बताते हैं,पर जीवट का धनी वह व्यक्ति पूरी जीवटता और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य पूर्ती में जुट जाता है और 7-8 सालों में एक बंजर पथरीली पहाड़ी पर 1-2 नहीं, 100-200 नहीं, 1000-2000नहीं पूरे 35000 वृक्ष लगाकर उस पहाड़ी को हरी भरी बनाने में सफलता प्राप्त करता है।
यहां मैं उक्त चर्चा कर रहा हूं होलकर कॉलेज इंदौर के रिटायर्ड प्राचार्य श्री शंकरलाल जी गर्ग की।
माँ भारती के लाड़ले सपूत,स्वर्गीय श्री श्यामदास जी अग्रवाल "भैयाजी" का जन्मदिन मनाने के लिए हुई ट्रस्ट की मीटिंग में नारायण अग्रवाल भैया ने अपने मामाजी शंकरलाल जी गर्ग के बारे में बताया और फिर तय यह हुआ कि भैयाजी की पावन पुण्य स्मृति में इस बार गर्ग साहब के केसर पर्वत पर वृक्षारोपण किया जाए।
रविवार 30 जून को विजयंत ग्रुप के हम लगभग 80 सदस्य महू गवली पलासिया होते हुए जामली पहुंचे।जामली में ग्रुप के सक्रिय सदस्य भाई श्री कृष्णकांत मुजावदिया जी की गिट्टी क्रेशर खदान है तो उनसे बात कर बच्चों को वह दिखाने का कार्यक्रम बना लिया।संयोगवश कृष्णकांत जी इंदौर में ही व्यस्त थे तो खदान और प्लांट दिखाने के लिए उनके पार्टनर गणेश भैया अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उपस्थित थे।बहुत ही प्यार से उन्होंने पूरे ग्रुप को पूरे प्लांट को विजिट कराई।आर्टिफिशियल रेत,पांच प्रकार की गिट्टी कैसे बनती है,कैसे ब्लास्टिंग कर पहाड़ खोदे जाते है,बच्चों ने भी बड़े रुचि से देखे समझे।गिट्टी के छोटे छोटे टीलों पर बिंदास दौड़ भी लगाई बच्चों ने।गणेश भैया ने गरम गरम कचोरिया बुलवाकर बच्चों को खिलवाई।धन्यवाद गणेश भैया🙏 धन्यवाद कृष्णकांत जी🙏
जी भर कर मस्ती करने के बाद वानर सेना पहुंची केसर पर्वत पर।गर्ग साहब ने बच्चों का स्वागत किया और बच्चों को पर्वत पर किया हुआ वृक्षारोपण दिखाना शुरू किया।आम, जाम, अनार, जामुन, फालसे, मौसंबी, सागवान, शीशम, चंदन, इलायची, कचनार, गुलमोहर, सफेद आंकड़ा, विधारा, स्टीविया, अंगूर की बेल, पीपल,शमी,पुत्रजीवा, नीम, बरगद, कटहल,बादाम,पारस पीपल,केले क्या नहीं देखे बच्चों ने यहाँ।पर ज्यादा उत्सुकता से देखे थाईलैंड के ड्रेगन फ्रूट,इटली से लाए ओलिव,आस्ट्रेलिया से लाएàas आवाकोडो,काश्मीर से लाए केसर और बेट बनाने में काम में आने वाले विलो,मेक्सिको का खजूर और नेपाल से लाए सेब।अभिभूत थे हम सभी यहां एक ही जगह इतने प्रकार के इतने पौधों को देखकर।गर्ग साहब ने बताया कि इस पहाड़ी पर लगभग 400 प्रजातियों के 35000 वृक्ष वे लगा चुके हैं।4डिग्री तापमान में उगने वाले ये कई पौधे यहां मालवा की 45डिग्री की गर्मी में भी सफलतापूर्वक उग गए और बड़े भी हो रहें है भले ही उनकी रफ्तार कुछ धीमी हो।
उन्होंने यह भी बताया कि अधिकतर पौधों को फरवरी-मार्च में रोपा और एक जैसे पौधे एक साथ लगाए यानी कभी भी एक प्रजाति के पौधे को अकेले नहीं लगाया। कम से कम दो आम, दो ऑलिव, दो सेब साथ लगाए। इससे पौधों की ग्रोथ अच्छी हुई।
प्रो. गर्ग कहते हैं कि अच्छे परिणामों ने हौसला बढ़ाया तो मालवा के मौसम में लगभग असंभव केसर की खेती शुरू की। तीन साल में 15 पौधों से शुरू कर लगभग 1000 पौधों तक केसर पहुंच गई है। इसी कारण पहाड़ी का नाम केसर पर्वत कर दिया है।
विदेशों से काली थैलियों में लेकर लाए गए पौधे सीधे नहीं लगा दिए गए, उन्हें 8-10 दिन वैसे ही रहने दिया। पानी देते रहे, ताकि वे वातावरण से अनुकूलता बना लें। 10-15 दिन बाद लगाया तो वे पनप गए। कम पानी में पौधों को जीवित रखने के लिए उनकी आसपास घास व खरपतवार का बैंड बनाया, ताकि वे अधिक देर तक नमी को पौधे के आसपास बनाए रखे।इतनी जानकारी पाकर हम सभी रोमांचित थे और सलाम कर रहे थे गर्ग साहब की जिजीविषा को उनके समर्पण को।
पैरों के एक्युप्रेशर के लिए बनाए उनके रेत,गिट्टी,पत्थर,पानी की एक्टिविटी को बच्चों ने खूब एंजॉय किया।
बच्चों ने विजयंत स्काउट ग्रुप के संरक्षक स्वर्गीय श्री श्यामदास जी अग्रवाल "भैयाजी" एवं विजयंत स्काउट ग्रुप के संस्थापक स्वर्गीय श्री प्रकाश जी दिसोरिया की पावन पुण्य स्मृति में वृक्षारोपण भी किया।इतने सात्विक वातावरण में इतनी जानकारी पौधों को पाकर जब बच्चों ने वृक्षारोपण किया तो उनके चेहरों का तेज देखने लायक था।
ग्रुप के अध्यक्ष आदरणीय रामदासजी गोयल ने भी स्काउट गाइड को संबोधित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं दी।
प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री राधेश्याम जी शर्मा गुरुजी, डॉ श्री यशवंत जी गोयल, श्री खंडेलवाल भी इस अवसर पर स्काउट गाइड से मिले।
पहली बार ग्रुप के साथ हाइक में आए श्री राजेश जी शर्मा जहां सभी बच्चों के लिए कांजी बड़े और गुलाबजामुन बनवाकर लाए तो श्री ध्यानेश्वर नारायण जी सालुंके ने भंवरीलाल के लड्डू सभी बच्चों को खिलाए।गर्गसाहब ने बच्चों के लिए आलूबड़े बनवा दिए, रामदास जी ने अमूल की ठंडी ठंडी लस्सी पिलवा दी तो वापसी पर पारस भाई ने सब बच्चों को चोकोबार खिलवा दी,याने बच्चों का रविवार तो बन गया आज।
कुल मिलाकर बहुत ही अद्भुत,सार्थक और आनंददायक अनुभव रहा आज की इस केसर पर्वत हाइक का।
दिल से आभार डॉ एस एल गर्ग जी का इतने प्यार से स्काउट गाइड बच्चों की मेहमाननवाजी करने और उन्हें पर्यावरण संरक्षण एवं जीवन भर वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करने के लिए🙏🙏🙏
केसर पर्वत हाइक में उपस्थित सदस्यगण:-
अभिनंदन बिंजवे
अनूप बिंजवे
अवनी जैन
जास्मिन आमिर
साराह आमिर
अनिरुद्ध मुजावदिया
समर्थ अग्रवाल
मंथन जैन
साहिल जैन
राम्या खंडेलवाल
व्योम खंडेलवाल
ईशान जैन
वीरल सोनी
हीरल सोनी
रितिका पांचाल
पलक पांचाल
ऋषि सोनी
रश्मि
तनु कौशल
लक्ष्य जादम
अर्पित राठौर
पलकेश राठौर
ईश्वरी राजोरिया
विनायक राजोरिया
तमन्ना तंवर
इशिका तंवर
अंजली
नंदिनी
केशव पाल
कनक सुगंधी
रेयांश श्रीमाल
माही
साक्षी
तन्वी जादम
उमा जैन
याशिका सिद्धि
अश्विन चौहान
बुद्ध भूषण
रागिनी भारद्वाज
रश्मि भारद्वाज
अवनी राठौर
आद्रवी राठौर
लवी खंडेलवाल
प्रगति खंडेलवाल
तन्वी नीमा
सलोनी कसेरा
अक्षत नीमा
खुशी राठौर
जीविका कटारिया
अक्षत राजोरिया
डेविस मिनरेट
प्रिया सोनी
तनिष्का सोनी
रुद्रआदित्य आजाद
अक्षत जैन
कृषिव अग्रवाल
आराध्य बोडखा
फाल्गुनी
आराध्य
अंजली सोमानी
मृदुल
खुशी राठौर
निपांशी सिन्हा
अविघ्न सिन्हा
रावी सालुंके
रौनक सालुंके
नील बोहरा
नैतिक शर्मा
मंथन भंडारी
हर्ष परमार
विवान राठौर
अथर्व राठौर
अवंती खंडेलवाल
अनंत खंडेलवाल
प्रियांशी मावर
कृति गोस्वामी
त्रितिक्षा जैन
अतिवीर प्रजापत
श्री रामदास जी गोयल
श्री राधेश्याम जी शर्मा गुरुजी
श्रीमती माधुरी शर्मा
श्री डॉ यशवंत जी गोयल
श्री मुरलीधर जी धामानी
श्रीमती उमा जैन
श्रीमती हिमांशी गोयल
श्री अंकित सोनी
श्री रमेश मंत्री
श्री ध्यानेश्वर नारायण सालुंके
श्रीमती स्वाति सालुंके
श्रीमती पथिका वर्मा
श्री राजेश जी बिंजवे
श्री राजेश जी शर्मा
श्रीमती पूजा जैन
श्री अक्षय जैन
श्रीमती अर्शी आमिर
सुश्री चेतना यादव
श्री किशन थावरानी
श्री भुवनेश गायकवाड़
श्री प्रताप दुबे
श्री कुणाल मिश्र

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